जकार्ता एशियन गेम 2018 | जापान ने भारत को 2 - 1 से हराकर स्वर्ण पदक पर कब्जा किया

18वें एशियाई खेलों के महिला हॉकी के फाइनल में शुक्रवार को जापान ने भारत को 2 - 1 से हराकर स्वर्ण पदक पर कब्जा किया। जापान ने पहली बार एशियाई खेलों में महिला हॉकी का स्वर्ण पदक जीता। इसी के साथ भारत 2020 टोक्यो ओलंपिक में सीधे क्वालिफाई करने से चूक गया।
भारत ने 20 साल बाद महिला हॉकी का रजत पदक जीता है। इससे पहले भारत को रजत पदक 1998 एशियाई खेलों में मिला था  जब उसे दक्षिण कोरिया के हाथों फाइनल में पराजय का सामना करना पड़ा था। भारत ने एशियाई खेलों में एकमात्र स्वर्ण पदक पदक 1982  में जीता था जब पहली बार महिला हॉकी को एशियाई खेलों में शामिल किया गया था। भारत ने 2006 और 2014 एशियन गेम में कांस्य पदक अपने नाम किया था।
भारत का फाइनल में हारने का मुख्य कारण  पेनल्टी कॉर्नर का प्रभावी ढंग से बचाने में नाकाम रहना और जापान के गोलकीपर मेगुमी कागेयामा की बेहतरीन प्रदर्शन था।
दोनों टीमों ने आक्रमण की रणनीति से मैच शुरू किया। भारत को तीसरे  मिनट में गोल करने का एक सुनहरा मौका मिला जब रानी रामपाल ने एक बेहतरीन पास  नवनीत कोर को दिया  लेकिन जापान के गोलकीपर कागेयामा  ने शानदार बचाव किया। भारत को पहला पेनल्टी कॉर्नर  10वें मिनट में मिला जिसे जापान के गोलकीपर ने गुरजीत कौर के ड्रेग - फ्लिक रोक दिया । उसके 1 मिनट बाद जापान को पहला पेनल्टी कॉर्नर मिला जिसे शिहोरी ओकावा ने गोल करने में कोई चूक नहीं किया और जापान ने मैंच में  1-  0 से बढ़त बना ली।
भारतीय हॉकी टीम
नेहा गोयल ने 25वें  मिनट में गोल कर भारत को मैच में वापसी कराई । वंदना ने 35वें  मिनट में मिडफील्ड से एक बेहतरीन पास नवजोत कौर को दिया लेकिन नवजोत के प्रयास को जापान के गोलकीपर कागेयामा  ने असफल कर दिया।
जापान को 44वें मिनट में दूसरा पेनल्टी कॉर्नर मिला जिसे मोटोमी कवामुरा ने गोल में बदलकर  जापान को 2 - 1 से बढ़त दिलाई।
जापान ने चौथे क्वार्टर में मैच में आक्रमण करने की बजाय समय को गवाने में अधिक ध्यान दिया। उसके खिलाड़ियों ने पूरे समय को गेंद को कॉर्नर में खेल कर बर्बाद कर दिया जिससे भारतीय खिलाड़ी काफी निराश हो गए। 55वें मिनट में भारत के मोनिका मलिक को पीला कार्ड मिला जिस कारण भारत को 10 खिलाड़ियों के साथ ही खेलना पड़ा ।
भारत के वंदना को गोल करने का एक आखरी मौका खेल खत्म होने के 24 सेकंड पहले मिला जिसे जापान के गोलकीपर कागेयामा  ने असफल कर दिया। इस तरह भारत को रजत पदक से संतुष्ट होना पड़ा
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